Oplus_131072
उत्तराखंड , गैरसैंण : उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र 19 अगस्त से शुरु हुआ कहने को तो सत्र चार दिन का रहा, लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस के हंगामें के चलते सत्र कई बार स्थगित करना पड़ा, नतीजा यह हुआ कि सत्र 2 दिन में ही सिमटकर रह गया। जहां कांग्रेस सत्ता पक्ष पर आरोप लगा रही है कि उसने प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर कांग्रेस की मांग नियम 310 के तहत मुद्दे को नहीं उठने दिया, वही सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के लगातार हंगामे को सत्र अवधि में व्यवधान बताया।
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण में 19 अगस्त से विधानसभा क्षेत्र शुरू हुआ, 4 दिन का यह सत्र 19 अगस्त से शुरू होकर 22 अगस्त तक चलना था, लेकिन दो दिन पूर्व ही सत्र अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। सत्र की शुरुआत से ही कांग्रेस लगातार नियम 310 के तहत प्रदेश में पंचायत चुनाव के दौरान बेतालघाट में गोलाबारी की घटना को लेकर मुद्दा उठाने की बात करती रही। जिसके चलते सदन को कई बार स्थगित भी करना पड़ा। कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए सत्ता पक्ष ने नियम 310 के तहत कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं उठाया।
वही सत्ता पक्ष का कहना है कि वह सदन की कार्रवाई को चलाने के लिए लगातार विपक्ष का सहयोग मांगता रहा, लेकिन विपक्ष अपने मुद्दे पर अड़ा रहा जो पहले से ही न्यायालय में चल रहा है। जिसके चलते कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी। हालांकि इस दौरान नौ विधेयक पारित किए गए, साथ ही अनुपूरक बजट भी पारित किया गया।
बहरहाल जहां एक ओर सत्ता पक्ष, विपक्ष के द्वारा सहयोग न किए जाने की बात कर रहा है, वही विपक्ष उसकी बात ना सुने जाने का सत्ता पक्ष पर आरोप लगा रहा है, लेकिन इन सब के बीच उत्तराखंड के आमजन की उम्मीद और कई मुद्दे सदन में नहीं उठ सके। प्रदेश में मानसून सीजन अभी भी चल रहा है लेकिन आपदा का मुद्दा हंगामे के बीच किसी कोने में सिमट कर रह गया। इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा आखिर क्यों नहीं हो सकी इसका जवाब अभी भी उत्तराखंड की जनता तलाश रही है? सवाल यह भी उठता है कि क्या सदन केवल हंगामे के लिए ही बना है या फिर गैरसैण में विधानसभा सत्र करवाना महज एक औपचारिकता भर है? हालांकि बेमानी ही सही लेकिन उम्मीद की जाती है कि सत्ता पक्ष व विपक्ष अपने जनप्रतिनिधि होने की हैसियत से अपनी भूलों का सुधार करेंगे और आने वाले सत्र में इस गलती को नहीं दोहराएंगे।
