उत्तराखंड से बड़ी खबर निकलकर आ रही है। जहां पूर्व मुख्य सचिव के बेटे के द्वारा कुछ लोगों से ठगी की गई। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। मामले के संबंध में एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि अंशुल त्यागी नाम के व्यक्ति ने 8 जुलाई को एक ठगी की एफआईआर दर्ज करी। जिसमें बताया गया कि उनकी यशवर्धन नाम के व्यक्ति से कुछ महीने पहले मुलाकात हुई थी और अंशुल त्यागी अपनी दिवंगत माताजी की स्मृति पर कंपनी रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते थे इसी को लेकर यशवर्धन से उनकी मुलाकात हुई।
पिता (पूर्व मुख्य सचिव) के पद, प्रभाव का लिया सहारा
उसने खुद को वरिष्ठ अधिकारी का बेटा बताने के साथ कई एजेंसी में जान पहचान और जल्दी रजिस्ट्रेशन, NOC व फैसिलिटेशन करवाने की बात कही। जिसकी एवज में अंशुल त्यागी ने 15 लाख रुपए दे दिए। हालांकि लंबे समय तक काम न होने के चलते अंशुल त्यागी को ठगी का एहसास हुआ और मामला पंजीकृत किया गया।
Phd स्कॉलर से भी ठगी की
Sp सिटी ने यह भी बताया कि बीते दिन भी एक और मामला सामने आया जिसमें कैनाल रोड निवासी एक पीएचडी स्कॉलर को भी डाटा साइंस कंसलटेंट में नौकरी का झांसा देकर करीब 4:30 लाख ठगे एसपी सिटी ने बताया कि जैसे-जैसे पुलिस के द्वारा साक्ष्य इकट्ठे किए गए तो इसमें धाराओं को भी बढ़ाया गया। फिलहाल आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
upsc की करता था तैयारी, नाकाम रहा, बना ठग
एसपी सिटी ने यह भी बताया कि आरोपी यशवर्धन यूपीएससी की तैयारी करता था, लेकिन उसमें सफल नहीं हो पाया और उसका अफसर बनने का सपना अधूरा रह गया। लेकिन आईपीएस की लग्जरी जिंदगी व चका चौंध से वह काफी प्रभावित रहा, जिसके चलते उसने यह रास्ता चुना।
बड़ा सवाल क्या चका चौंध ही सिविल सर्विस की एकमात्र पहचान ?
अब इस पूरी घटना के बाद एक बड़ा सवाल फिर से समाज के सामने खड़ा हो गया है! क्योंकि इस तरह के फर्जी आईपीएस या सैनिक अधिकारी बनकर ठगी करने का या प्रभाव जमाने का मामला कोई पहला नहीं! बल्कि इस तरह के मामले देश में पहले भी कई बार आ चुके हैं। सवाल यह उठता है कि सिविल सेवा क्या सिर्फ लग्जरी और हाई प्रोफाइल जीवन जीने का ही नाम है? क्या युवाओं को जो सपने दिखाए जाते हैं उनके पीछे की कड़ी मेहनत और उस पद पर पहुंचने के बाद जिम्मेदारियों का एहसास भी कराया जाता है। हम सबको यह भी समझना होगा कि सिविल सर्विस केवल पावर और चका चौंध की ही जिंदगी नहीं बल्कि कठिन परिश्रम का एक ऐसा सफर है जो पद मिलने के बाद भी जारी रहता है और समाज के प्रति एक बड़ा उत्तरदायित्व भी है। जिसमें अक्सर सिविल सर्वेंट को दिन-रात समाज के लिए कठिन परिस्थितियों में कार्य भी करना होता है और अपने फैसलों से समाज की समस्याओं और इसके समाधान की दिशा में भी आगे बढ़ना होता है।
